जो बाइडेन के प्रेसिडेंट बनने से अमेरिका और भारत के रिश्ते मजबूत ही होंगे, जानिए क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अच्छे दोस्त डोनाल्ड ट्रम्प अब अमेरिका के राष्ट्रपति नहीं रहे। उनकी जगह डेमोक्रेट जो बाइडेन लेने वाले हैं। वह भी भारत के लिए नए नहीं हैं। हमने उन्हें प्रेसिडेंट बराक ओबामा के वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर कई प्लेटफॉर्म्स पर भारत का पक्ष लेते देखा है। जो बाइडेन ही थे, जिन्होंने अमेरिका की ओर से संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का अधिकृत समर्थन किया था। जिस गति से ओबामा प्रशासन ने भारत से रिश्तों को आगे बढ़ाया, उसी गति से ट्रम्प उन्हें आगे लेकर गए। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि 2000 के बाद से अमेरिका के भारत को लेकर रुख में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है। फिर चाहे अमेरिका में रिपब्लिकन प्रेसिडेंट हो या डेमोक्रेट। क्लिंटन से शुरू होकर जॉर्ज बुश के बाद ओबामा और ट्रम्प ने भी रिश्तों को मजबूती देने की कोशिश की है। बाइडेन खेमे में चीन को लेकर सोच अलग है और यह भारत के रिश्तों को प्रभावित कर सकती है।

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बाइडेन का अब तक भारत के लिए क्या रुख रहा है?
बराक ओबामा प्रशासन में वाइस-प्रेसिडेंट बनने से पहले से बाइडेन भारत के साथ मजबूत रिश्तों की पैरवी करते रहे हैं। सीनेट की फॉरेन रिलेशंस कमेटी के चेयरमैन और उसके बाद वाइस-प्रेसिडेंट रहने के दौरान उन्होंने भारत के साथ मजबूत स्ट्रैटजिक भागीदारी बढ़ाने की बात कही है।

2006 में बाइडेन ने कहा था कि 2020 की मेरे सपने की दुनिया में अमेरिका और भारत सबसे नजदीकी देश है। 2008 में भी जब भारत-अमेरिका न्यूक्लियर डील पर सीनेटर ओबामा हिचक रहे थे, तब बाइडेन ने ही अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स को इसके लिए राजी किया। बाइडेन ने वाइस-प्रेसिडेंट रहते हुए स्ट्रैटजिक क्षेत्रों में भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूती देने की बात हमेशा से की है। उनके ही टैन्योर में अमेरिका ने UN सिक्योरिटी काउंसिल को विस्तार करने और भारत को स्थायी सदस्य बनाने के लिए औपचारिक रूप से समर्थन किया था।

ओबामा-बाइडेन प्रशासन ने ही भारत को मेजर डिफेंस पार्टनर घोषित किया था। अमेरिका ने पहली बार किसी देश को यह स्टेटस दिया और वह भी भारत को। ओबामा प्रशासन के आखिरी दिनों में लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) किया, जो मिलिट्री कोऑपरेशन के तीन फाउंडेशनल पैक्ट्स में से एक था। इसके बाद के दो एग्रीमेंट COMCASA और BECA ट्रम्प प्रशासन ने किए।

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